Machal Machal Ke Chalo Yaar Ne Pukara Hai
मचल मचल के चलो यार ने पुकारा है क़सम ख़ुदा की वहीं ख़ुल्द का नज़ारा है...
Complete collection of 31 Hindi naats.
मचल मचल के चलो यार ने पुकारा है क़सम ख़ुदा की वहीं ख़ुल्द का नज़ारा है...
वो शहर-ए-मोहब्बत जहाँ मुस्तफ़ा हैं वहीं घर बनाने को जी चाहता है...
या नबी सलाम 'अलैका ! या रसूल सलाम 'अलैका !...
का'बा दिखा दे, मौला ! मौला ! का'बा दिखा दे, मौला !...
रुत्बा ये विलायत में क्या ग़ौस ने पाया है अल्लाह ने वलियों का सरदार बनाया है...
क्या बताऊँ कि क्या मदीना है बस मेरा मुद्द'आ मदीना है...
ऐ सबा ! मुस्तफ़ा से जा कहना, ग़म के मारे सलाम कहते हैं सब्ज़-गुंबद की उन बहारों को ...
ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए...
बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना आ दिल में तुझे रख लूँ, ऐ जल्वा-ए-जानाना !...
सुनते हैं कि महशर में सिर्फ़ उन की रसाई है गर उन की रसाई है लो जब तो बन आई है...
चमक तुझ से पाते हैं सब पाने वाले मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले...
या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा...
आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर ! मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, ...
मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ जितने मंज़र हैं मदीने के वो सारे देखूँ...
नूर का समाँ छाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया फ़ैज़-ए-मुस्तफ़ा लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया...
नूर का समाँ छाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया फ़ैज़-ए-मुस्तफ़ा लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया...
सैर-ए-गुलशन कौन देखे दश्त-ए-तयबा छोड़ कर सू-ए-जन्नत कौन जाए दर तुम्हारा छोड़ कर...
दिल में हो याद तेरी गोशा-ए-तन्हाई हो फिर तो ख़ल्वत में 'अजब अंजुमन-आराई हो...
ख़्वाजा-ए-हिन्द ! वो दरबार है आ'ला तेरा कभी महरूम नहीं माँगने वाला तेरा...
बयाँ हो किस ज़बाँ से मर्तबा सिद्दीक़-ए-अकबर का है यार-ए-ग़ार महबूब-ए-ख़ुदा सिद्दीक़-ए...
शैअन-लिल्लाह, या 'अब्दुल क़ादिर ! या साकिन बग़दाद ! या शैख़ अल-जीलानी !...
ऐ राहत-ए-जाँ ! जो तेरे क़दमों से लगा हो क्यूँ ख़ाक-बसर सूरत-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा हो...
'अजब करम शह-ए-वाला तबार करते हैं कि ना-उमीदों को उम्मीदवार करते हैं...
निगाह-ए-लुत्फ़ के उम्मीदवार हम भी हैं लिए हुए ये दिल-ए-बे-क़रार हम भी हैं...
मेरे सिद्दीक़-ए-अकबर ! मेरे सिद्दीक़-ए-अकबर ! मेरे सिद्दीक़-ए-अकबर ! मेरे...
असीरों के मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! फ़क़ीरों के हाजत-रवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म !...
मुरादें मिल रही हैं, शाद शाद उन का सुवाली है लबों पर इल्तिजा है, हाथ में रौज़े की...
ऐसा तुझे ख़ालिक़ ने तरह-दार बनाया यूसुफ़ को तेरा तालिब-ए-दीदार बनाया...
नहीं ख़ुश-बख़्त मोहताजान-ए-'आलम में कोई हम सा मिला तक़दीर से हाजत-रवा फ़ारूक़-ए-आ'ज़म ...
ऐ दीन-ए-हक़ के रहबर ! तुम पर सलाम हर दम मेरे शफ़ी'-ए-महशर ! तुम पर सलाम हर दम...
न हो आराम जिस बीमार को सारे ज़माने से उठा ले जाए थोड़ी ख़ाक उन के आस्ताने से...