Hindi #5

Al Madad Peeran-e-Peer Ghaus-e-Azam Dastageer

📜 Hindi 🎵 99 Lines ⏱️ 5 Min Read ✨ Naat Shareef

रुत्बा ये विलायत में क्या ग़ौस ने पाया है

अल्लाह ने वलियों का सरदार बनाया है

है दस्त-ए-'अली सर पर, हसनैन का साया है

मेरे ग़ौस की ठोकर ने मुर्दों को जिलाया है

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

लाखों ने उसी दर से तक़दीर बना ली है

बग़दादी सँवरिया की हर बात निराली है

डूबी हुई कश्ती भी दरिया से निकाली है

ये नाम अदब से लो, ये नाम जलाली है

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

हर फ़िक्र से तुम हो कर आज़ाद चले जाओ

ले कर के लबों पर तुम फ़रियाद चले जाओ

मिलना है अगर तुम को वलियों के शहंशा से

ख़्वाजा से इजाज़त लो, बग़दाद चले जाओ

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

ग़ौर कीजे कि निगाह-ए-ग़ौस का क्या हाल है

है क़ुतुब कोई, वली कोई, कोई अब्दाल है

दूर है जो ग़ौस से, बद-बख़्त है, बद-हाल है

जो दीवाना ग़ौस का है सब में बे-मिसाल है

दीन में ख़ुश-हाल है, दुनिया में माला-माल है

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

मिलने को शमा' से ये परवाना तड़पता है

क़िस्मत के अँधेरों में दिन-रात भटकता है

इस 'इश्क़-ए-हक़ीक़ी में इतना तो असर आए

जब बंद करूँ आँखें, बग़दाद नज़र आए

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अंदाज़ बयाँ उन का हम कर नहीं पाएँगे

अजमेर से हो कर हम बग़दाद को जाएँगे

जब आए बला हम पर, हम उन को बुलाएँगे

तुम दिल से सदा तो दो, वो हाथ बढ़ाएँगे

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

या ग़ौस ! करम कर दो, या ग़ौस ! करम कर दो

वो दीन की दौलत से दामन को मेरे भर दो

बस इतनी गुज़ारिश है, बस एक नज़र कर दो

बग़दाद की गलियों में छोटा सा मुझे घर दो

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-उल-आ'ज़म दस्त-गीर !

ना'त-ख़्वाँ:

अज़ीम नाज़ा

ग़ौस-ए-आ'ज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददे

क़िब्ला-ए-दीं मददे का'बा-ए-ईमाँ मददे

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

बग़दाद के वाली का लो 'उर्स फिर आया है

दीवानों के चेहरों पर इक कैफ़ सा छाया है

आया है मदीने से इक पंजतनी सेहरा

दूल्हा शह-ए-जीलाँ को हूरों ने बनाया है

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

इस मतलबी दुनिया में कोई न हमारा है

या ग़ौस पिया ! हम को बस तेरा सहारा है

बग़दाद से आई है इमदाद तेरी फ़ौरन

या ग़ौस ! तुझे हम ने जब जब भी पुकारा है

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

पीरान-ए-पीर अल-मदद ! रौशन-ज़मीर अल-मदद !

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

क्या कोई समझ पाए रुत्बा शह-ए-जीलाँ का

वलियों के सरों पर है तल्वा शह-ए-जीलाँ का

शाहान-ए-ज़माना से क्या कोई रखे मतलब

जब शाहों से बढ़ कर है मँगता शह-ए-जीलाँ का

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

या ग़ौस पिया ! तेरी बे-मिस्ल सख़ावत है

मँगतों का तही-दामन भरना तेरी 'आदत है

हैदर का तू प्यारा है, ज़हरा का दुलारा है

चेहरे से अयाँ तेरे हसनैन की रँगत है

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

पीरान-ए-पीर अल-मदद ! रौशन-ज़मीर अल-मदद !

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

या ग़ौस पिया ! मेरी तक़दीर जगा दीजे

मुझ बेकस-ओ-बेबस पर लिल्लाह करम कीजे

आने के लिए दर पर मुद्दत से तड़पता हूँ

या ग़ौस ! मुझे अब तो बग़दाद बुला लीजे

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

ये रब की 'इनायत है, हम क़ादरी मँगते हैं

बग़दाद के वाली पर सौ जान से मरते हैं

दिल वज्द में आता है और रूह मचलती है

हम, सैफ़ ! वज़ीफ़ा जब "या ग़ौस" का करते हैं

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

अल-मदद, पीरान-ए-पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

पीरान-ए-पीर अल-मदद ! रौशन-ज़मीर अल-मदद !

या ग़ौस अल-मदद ! या ग़ौस अल-मदद !

शायर:

सैफ़ क़ादरी इलाहाबादी

ना'त-ख़्वाँ:

हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी

साहिल रज़ा क़ादरी