Hindi #4

Kaba Dikha De Maula

📜 Hindi 🎵 54 Lines ⏱️ 3 Min Read ✨ Naat Shareef

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

'उम्र बची है मेरी कहाँ

मर ही न जाऊँ, मौला ! यहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

कभी गिर्द का'बे के मैं भी तो घूमूँ

कभी मैं भी का'बे की चादर को चूमूँ

मुझे भी दिखा दे, ख़ुदाया ! हरम वो

बरसती है रहमत की बारिश जहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

कभी संग-ए-असवद का बोसा 'अता हो

कि मरने से पहले ख़तम हर ख़ता हो

तमन्ना, मेरे रब ! ये पूरी तू कर दे

इसी जुस्तुजू में हूँ जीता यहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

मैं अक्सर ही यादों में का'बे को पहुँचा

मैं कितना हूँ तड़पा, मैं कितना हूँ रोया

है बेचैन, मौला ! ये दिल मेरा कितना

करूँ कैसे मैं ये लबों से बयाँ ?

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

कई हो के आए हैं देखो वहाँ से

कि मैं सिर्फ़ जा ही न पाया यहाँ से

ज़ियारत हरम की है कितनों ने कर ली

तेरी अब निगाह-ए-करम हो यहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

कई लोग जाते हैं ऐसे हरम को

कि जैसे हरम हो क़दम दो क़दम को

बड़ा ख़ूब उन का मुक़द्दर है, मौला !

ये औक़ात वैसी है मेरी कहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

कि का'बे की रौनक़ को मैं भी तो देखूँ

दिखा मुझ को का'बा, मेरे प्यारे मौला !

कि मुझ को लगी ये लगन, मेरे मौला !

कि चूमूँ मैं हज्र-ए-असवद वहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

सुना है वहाँ पर कि हज हो रहा है

ये परवान सुन कर यहाँ रो रहा है

बुला ले, ख़ुदाया ! इसे भी हरम में

लगी आग दिल की बुझा दे वहाँ

का'बा दिखा दे, मौला ! मौला !

का'बा दिखा दे, मौला !

शायर:

शफ़ीक़ अल्लाह यार परवान

ना'त-ख़्वाँ:

ज़ोहैब अशरफ़ी

सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी

ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी