ऐ दीन-ए-हक़ के रहबर ! तुम पर सलाम हर दम
मेरे शफ़ी'-ए-महशर ! तुम पर सलाम हर दम
इस बेकस-ओ-हज़ीं पर जो कुछ गुज़र रही है
ज़ाहिर है सब वो तुम पर, तुम पर सलाम हर दम
दुनिया-ओ-आख़िरत में जब मैं रहूँ सलामत
प्यारे ! पढ़ूँ न क्यूँकर तुम पर सलाम हर दम
दिल-तफ़्तग़ान-ए-फ़ुर्क़त प्यासे हैं मुद्दतों से
हम को भी जाम-ए-कौसर, तुम पर सलाम हर दम
बंदा तुम्हारे दर का आफ़त में मुब्तला है
रहम, ऐ हबीब-ए-दावर ! तुम पर सलाम हर दम
बे-वारिसों के वारिस ! बे-वालियों के वाली !
तस्कीन-ए-जान-ए-मुज़्तर ! तुम पर सलाम हर दम
लिल्लाह अब हमारी फ़रियाद को पहुँचिए
बे-हद है हाल अब्तर, तुम पर सलाम हर दम
जल्लाद-ए-नफ़्स-ए-बद से दीजे मुझे रिहाई
अब है गले पे ख़ंजर, तुम पर सलाम हर दम
दरयूज़ा-गर हूँ मैं भी अदना सा इस गली का
लुत्फ़-ओ-करम हो मुझ पर, तुम पर सलाम हर दम
कोई नहीं है मेरा, मैं किस से दाद चाहूँ ?
सुल्तान-ए-बंदा-परवर ! तुम पर सलाम हर दम
ग़म की घटाएँ घिर कर आई हैं हर तरफ़ से
ऐ मेहर-ए-ज़र्रा-परवर ! तुम पर सलाम हर दम
बुलवा के अपने दर पर अब मुझ को दीजे 'इज़्ज़त
फिरता हूँ ख़्वार दर दर, तुम पर सलाम हर दम
मोहताज से तुम्हारे करते हैं सब किनारा
बस इक तुम्हीं हो यावर, तुम पर सलाम हर दम
बहर-ए-ख़ुदा बचाओ, इन ख़ारहा-ए-ग़म से
इक दिल है लाख नश्तर, तुम पर सलाम हर दम
कोई नहीं हमारा, हम किस के दर पे जाएँ ?
ऐ बेकसों के यावर ! तुम पर सलाम हर दम
क्या ख़ौफ़ मुझ को, प्यारे ! नार-ए-जहीम से हो
तुम हो शफ़ी'-ए-महशर, तुम पर सलाम हर दम
अपने गदा-ए-दर की लीजे ख़बर ख़ुदा-रा
कीजे करम हसन पर, तुम पर सलाम हर दम
शायर:
मौलाना हसन रज़ा ख़ान
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी