Hindi #29

Nahin Khush-bakht Mohatajan-e-Aalam Mein Koi Hum Sa

📜 Hindi 🎵 26 Lines ⏱️ 1 Min Read ✨ Naat Shareef

नहीं ख़ुश-बख़्त मोहताजान-ए-'आलम में कोई हम सा

मिला तक़दीर से हाजत-रवा फ़ारूक़-ए-आ'ज़म सा

तेरा रिश्ता बना शीराज़ा-ए-जम'इय्यत-ए-ख़ातिर

पड़ा था दफ़्तर-ए-दीन-ए-किताबुल्लाह बरहम सा

मुराद आई, मुरादें मिलने की प्यारी घड़ी आई

मिला हाजत-रवा हम को दर-ए-सुल्तान-ए-'आलम सा

तेरे जूद-ओ-करम का कोई अंदाज़ा करे क्यूँकर

तेरा इक इक गदा फ़ैज़-ओ-सख़ावत में है हातिम सा

ख़ुदा-रा मेहर कर, ऐ ज़र्रा-परवर मेहर-ए-नूरानी !

सियाह-बख़्ती से है रोज़-ए-सियाह मेरा शब-ए-ग़म सा

तुम्हारे दर से झोली-भर मुरादें भर कर उट्ठेंगे

न कोई बादशाह तुम सा, न कोई बे-नवा हम सा

फ़िदा, ऐ उम्म-ए-कुलसूम ! आप की तक़दीर-ए-यावर के

'अली बाबा हुआ, दूल्हा हुआ फ़ारूक़-ए-अकरम सा

ग़ज़ब में दुश्मनों की जान है तेग़-ए-सर-अफ़ग़न से

ख़रूज-ओ-रफ़्ज़ के घर में न क्यूँ बरपा हो मातम सा

शयातीं मुज़्महिल हैं तेरे नाम-ए-पाक के डर से

निकल जाए न क्यूँ रफ़्फ़ाज़-ए-बद-अतवार का दम सा

मनाएँ 'ईद जो ज़िल-हिज्जा में तेरी शहादत की

इलाही ! रोज़-ओ-माह-ओ-सिन उन्हें गुज़रे मुहर्रम सा

हसन दर 'आलम-ए-पस्ती सर-ए-रिफ़'अत अगर दारी

बिया फ़र्क़-ए-इरादत बर दर-ए-फ़ारूक़-ए-आ'ज़म सा

शायर:

मौलाना हसन रज़ा ख़ान

ना'त-ख़्वाँ:

ओवैस रज़ा क़ादरी