चमक तुझ से पाते हैं सब पाने वाले
मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले
बरसता नहीं देख कर अब्र-ए-रहमत
बदों पर भी बरसा दे बरसाने वाले
मदीने के ख़ित्त़े ! ख़ुदा तुझ को रखे
ग़रीबों फ़क़ीरों के ठहराने वाले
तू ज़िंदा है वल्लाह, तू ज़िंदा है वल्लाह
मेरे चश्म-ए-'आलम से छुप जाने वाले
मैं मुजरिम हूँ, आक़ा ! मुझे साथ ले लो
कि रस्ते में हैं जा-ब-जा थाने वाले
हरम की ज़मीं और क़दम रख के चलना
अरे सर का मौक़ा' है, ओ जाने वाले !
चल उठ जब्हा-फ़र्सा हो साक़ी के दर पर
दर-ए-जूद ऐ मेरे मस्ताने वाले !
तेरा खाएँ तेरे ग़ुलामों से उलझें
हैं मुन्किर 'अजब खाने ग़ुर्राने वाले
रहेगा यूँ ही उन का चर्चा रहेगा
पड़े ख़ाक हो जाएँ जल जाने वाले
अब आई शफ़ा'अत की सा'अत अब आई
ज़रा चैन ले, मेरे घबराने वाल !
रज़ा ! नफ़्स दुश्मन है दम में न आना
कहाँ तुम ने देखे हैं चन्द्राने वाले
शायर:
इमाम अहमद रज़ा ख़ान
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
मीलाद रज़ा क़ादरी
हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरी