Hindi #12

Ya Rabb-e-Mustafa Tu Mujhe Hajj Pe Bula

📜 Hindi 🎵 63 Lines ⏱️ 4 Min Read ✨ Naat Shareef

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

हज का शरफ़ हो फिर 'अता, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

मीठा मदीना फिर दिखा, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

रुख़ सू-ए-का'बा, हाथ में ज़मज़म का जाम हो

पी कर करूँ मैं फिर दु'आ, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

रोती रहे जो हर घड़ी 'इश्क़-ए-रसूल में

वो आँख दे दे, या ख़ुदा या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

दे दे तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-का'बा का फिर शरफ़

फ़रमा ये पूरा मुद्द'आ, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

आँखों में जल्वा शाह का और लब पे ना'त हो

जब रूह तन से हो जुदा, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

फ़िरदौस में पड़ोस दे अपने हबीब का

मौला 'अली का वासिता, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

सब अहल-ए-ख़ाना साथ में हों काश ! चल पड़े

सू-ए-मदीना क़ाफ़िला, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

मुझ को बक़ी'-ए-पाक में मदफ़न नसीब हो

ग़ौस-उल-वरा का वासिता, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

तू बे-हिसाब बख़्श दे 'अत्तार-ए-ज़ार को

तुझ को नबी का वासिता, या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा !

या रब्ब-ए-मुस्तफ़ा ! तू मुझे हज पे बुला

आ के मैं देख लूँ आँख से का'बा तेरा

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

या अल्लाह या अल्लाह ! या अल्लाह या अल्लाह !

शायर:

मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी

ना'त-ख़्वाँ:

हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी

सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी