आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर !
मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, हुज़ूर !
मेरा दिल, धड़कन, जिगर, साँसों की मंज़िल आप हैं
दर्द की मौजों में इक राहत का साहिल आप हैं
जाँ लुटाई जाए जिस पर उस के क़ाबिल आप हैं
'इश्क़ का मक़्सूद हैं, मक़्सद हैं हासिल आप हैं
मेरी साँसों की रवानी आप की ख़ातिर, हुज़ूर !
है फ़िदा कुल ज़िंदगानी आप की ख़ातिर, हुज़ूर !
आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर !
मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, हुज़ूर !
आप का हर क़ौल, आक़ा ! मो'तबर मेरे लिए
आप के क़दमों का ज़र्रा है क़मर मेरे लिए
आप का दीदार मे'राज-ए-नज़र मेरे लिए
आप के ना'लैन-ए-अक़्दस ताज-ए-सर मेरे लिए
आप से मंसूब हर शय से 'अक़ीदत है, हुज़ूर !
सब से बढ़ कर आप से मुझ को मोहब्बत है, हुज़ूर !
आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर !
मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, हुज़ूर !
है तमन्ना ख़्वाब में उल्फ़त दिखाऊँ आप को
कह के, या रूही-व-नफ़्सी मैं बुलाऊँ आप को
आप के हस्सान सा गरचे सना-ख़्वाँ मैं नहीं
है तमन्ना आप की ना'तें सुनाऊँ आप को
'इश्क़ में बन जाऊँ ऐसा मैं भी दीवाना, हुज़ूर !
आप दें मुझ को तसल्ली मिस्ल-ए-हन्नाना, हुज़ूर !
आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर !
मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, हुज़ूर !
आप की नज़रों ने मोहताजों को सुल्ताँ कर दिया
आप की परवाज़ ने 'अक़्लों को हैराँ कर दिया
आप की निस्बत ने कमतर को भी ज़ी-शाँ कर दिया
आप के पैग़ाम ने हैवाँ को इंसाँ कर दिया
अहसन-ओ-अजमल-ओ-अफ़ज़ल या कि हम-रुत्बा, हुज़ूर !
ख़ल्क़ में कोई नहीं है आप के जैसा, हुज़ूर !
आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर !
मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, हुज़ूर !
आप हैं ऐसे हसीं कि यूसुफ़-ए-किन'आँ फ़िदा
आप पर फिर क्यूँ न हो मुझ जैसा इक नादाँ फ़िदा
आप पर कुल माल-ओ-ज़र, बाप और मेरी माँ फ़िदा
आप पर जिस जिस ने जाँ दी उस पे मेरी जाँ फ़िदा
क़ल्ब-ए-जा'फ़र के महल में आप बस्ते हैं, हुज़ूर !
बन के बारिश 'इश्क़ की हर दम बरसते हैं, हुज़ूर !
आप का मैं उम्मती हूँ ये मेरी क़िस्मत, हुज़ूर !
मेरे जीवन का है मक़्सद आप से उल्फ़त, हुज़ूर !
शायर:
मौलाना अबू जाफ़र
ना'त-ख़्वाँ:
सय्यिद वलीउल्लाह