Hindi #14

Main Bhi Aaqa Wo Tere Dar Ke Nazare Dekhun

📜 Hindi 🎵 22 Lines ⏱️ 1 Min Read ✨ Naat Shareef

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

जितने मंज़र हैं मदीने के वो सारे देखूँ

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

आप के पहलू में लेटे हैं अबू-बक्र-ओ-'उमर

रौज़े में आप के वो यार पियारे देखूँ

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

सुब्ह-ओ-शाम आते हैं क़ुदसी भी सलामी के लिए

ख़ुल्द के मिलते हैं जिस दर से इशारे देखूँ

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

सब के भरते हैं वहाँ कासे, वो दर है ऐसा

कैसे मिलते हैं वहाँ सब को सहारे देखूँ

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

कमली वाले का मैं मँगता हूँ, जहाँ वालो ! सुनो

देख कर ग़ैर की जानिब क्यूँ ख़सारे देखूँ

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

बड़ी हसरत है, शहाब ! आक़ा बुलाएँ दर पे

अपनी क़िस्मत के चमकते मैं सितारे देखूँ

मैं भी, आक़ा ! वो तेरे दर के नज़ारे देखूँ

शायर:

मुहम्मद शहाबुद्दीन सैफ़ी

ना'त-ख़्वाँ:

उमेर मुनीर क़ादरी