Hindi #19

Khwaja-e-Hind Wo Darbar Hai Aala Tera

📜 Hindi 🎵 42 Lines ⏱️ 2 Min Read ✨ Naat Shareef

ख़्वाजा-ए-हिन्द ! वो दरबार है आ'ला तेरा

कभी महरूम नहीं माँगने वाला तेरा

मय-ए-सर-जोश दर-आग़ोश है शीशा तेरा

बेख़ुदी छाए न क्यूँ पी के पियाला तेरा

ख़ुफ़्तगान-ए-शब-ए-ग़फ़्लत को जगा देता है

साल-हा-साल वो रातों का न सोना तेरा

है तेरी ज़ात 'अजब बहर-ए-हक़ीक़त, प्यारे !

किसी तैराक ने पाया न किनारा तेरा

जौर-ए-पामाली-ए-'आलम से इसे क्या मतलब

ख़ाक में मिल नहीं सकता कभी ज़र्रा तेरा

किस-क़दर जोश-ए-तहय्युर के अयाँ हैं आसार

नज़र आया मगर आईने को तल्वा तेरा

गुलशन-ए-हिन्द है शादाब, कलेजे ठंडे

वाह ऐ अब्र-ए-करम ! ज़ोर बरसना तेरा

क्या महक है कि मु'अत्तर है दिमाग़-ए-'आलम

तख़्ता-ए-गुलशन-ए-फ़िरदौस है रौज़ा तेरा

तेरे ज़र्रे पे म'आसी की घटा छाई है

इस तरफ़ भी कभी, ऐ मेहर ! हो जल्वा तेरा

तुझ में हैं तर्बियत-ए-ख़िज़्र के पैदा आसार

बहर-ओ-बर में हमें मिलता है सहारा तेरा

फिर मुझे अपना दर-ए-पाक दिखा दे, प्यारे !

आँखें पुर-नूर हों फिर देख के जल्वा तेरा

ज़िल्ल-ए-हक़ ग़ौस पे है, ग़ौस का साया तुझ पर

साया-गुस्तर ! सर-ए-ख़ुद्दाम पे साया तेरा

तुझ को बग़दाद से हासिल हुई वो शान-ए-रफ़ी'

दंग रह जाते हैं सब देख के रुत्बा तेरा

क्यूँ न बग़दाद में जारी हो तेरा चश्मा-ए-फ़ैज़

बहर-ए-बग़दाद ही की नहर है दरिया तेरा

कुर्सी डाली तेरी तख़्त-ए-शह-जीलाँ के हुज़ूर

कितना ऊँचा किया अल्लाह ने पाया तेरा

रश्क होता है ग़ुलामों को कहें आक़ा से

क्यूँ कहूँ रश्क-ए-दह-ए-बद्र है तल्वा तेरा

बशर अफ़ज़ल हैं मलक से तेरी यूँ मदह करूँ

न मलक ख़ास बशर करते हैं मुजरा तेरा

जब से तू ने क़दम-ए-ग़ौस लिया है सर पर

औलिया सर पे क़दम लेते हैं, शाहा ! तेरा

मुह्य-ए-दीं ग़ौस हैं और ख़्वाजा मु'ईनुद्दीं है

ऐ हसन ! क्यूँ न हो महफ़ूज़ 'अक़ीदा तेरा

शायर:

मौलाना हसन रज़ा ख़ान

ना'त-ख़्वाँ:

ओवैस रज़ा क़ादरी