Hindi #27

Muradein Mil Rahi Hain Shaad Shaad Un Ka Suwali Hai

📜 Hindi 🎵 56 Lines ⏱️ 3 Min Read ✨ Naat Shareef

मुरादें मिल रही हैं, शाद शाद उन का सुवाली है

लबों पर इल्तिजा है, हाथ में रौज़े की जाली है

तेरी सूरत तेरी सीरत ज़माने से निराली है

तेरी हर हर अदा, प्यारे ! दलील-ए-बे-मिसाली है

बशर हो या मलक, जो है तेरे दर का सुवाली है

तेरी सरकार वाला है, तेरा दरबार 'आली है

वो जग-दाता हो तुम, संसार बाड़े का सुवाली है

दया करना कि इस मँगता ने भी गुदड़ी बिछाली है

मुनव्वर दिल नहीं फ़ैज़-ए-क़ुदूम-ए-शह से रौज़ा है

मुशब्बक सीना-ए-'आशिक़ नहीं, रौज़े की जाली है

तुम्हारा क़ामत-ए-यकता है इक्का बज़्म-ए-वहदत का

तुम्हारी ज़ात-ए-बे-हमता मिसाल-ए-बे-मिसाली है

फ़रोग़-ए-अख़्तर-ए-बद्र आफ़ताब-ए-जल्वा-ए-'आरिज़

ज़िया-ए-ताले'-ए-बद्र उन का अब्रू-ए-हिलाली है

वो हैं अल्लाह वाले जो तुझे वाली कहें अपना

कि तू अल्लाह वाला है, तेरा अल्लाह वाली है

सहारे ने तेरे गेसू के फेरा है बलाओं को

इशारे ने तेरे अब्रू के आई मौत टाली है

निगह ने तीर ज़हमत के दिल-ए-उम्मत से खींचे हैं

मिज़ा ने फाँस हसरत की कलेजे से निकाली है

फ़क़ीरो बे-नवाओ ! अपनी अपनी झोलियाँ भर लो

कि बाड़ा बट रहा है, फ़ैज़ पर सरकार-ए-'आली है

तुझी को खिल'अत-ए-यकताई-ए-'आलम मिला हक़ से

तेरे ही जिस्म पर मौज़ूँ क़बा-ए-बे-मिसाली है

निकाला कब किसी को बज़्म-ए-फ़ैज़-ए-'आम से तुम ने

निकाली है तो आने वालों की हसरत निकाली है

बढ़े क्यूँकर न फिर शक्ल-ए-हिलाल इस्लाम की रौनक़

हिलाल-ए-आसमान-ए-दीं तेरी तेग़-ए-हिलाली है

फ़क़त इतना सबब है इन'इक़ाद-ए-बज़्म-ए-महशर का

कि उन की शान-ए-महबूबी दिखाई जाने वाली है

ख़ुदा शाहिद कि रोज़-ए-हश्र का खटका नहीं रहता

मुझे जब याद आता है कि मेरा कौन वाली है

उतर सकती नहीं तस्वीर भी हुस्न-ए-सरापा की

कुछ इस दर्जा तरक़्क़ी पर तुम्हारी बे-मिसाली है

नहीं महशर में जिस को दस्तरस आक़ा के दामन तक

भरे बाज़ार में उस बे-नवा का हाथ ख़ाली है

न क्यूँ हो इत्तिहाद-ए-मंज़िलत मक्के मदीने में

वो बस्ती है नबी वाली तो ये अल्लाह वाली है

शरफ़ मक्के की बस्ती को मिला तयबा की बस्ती से

नबी वाली ही के सदक़े में वो अल्लाह वाली है

वही वाली वही आक़ा वही वारिस वही मौला

मैं उन के सदक़े जाऊँ, और मेरा कौन वाली है

पुकार, ऐ जान-ए-'ईसा ! सुन लो अपने ख़स्ता-हालों की

मरज़ ने दर्दमंदों की ग़ज़ब में जान डाली है

मुरादों से तुम्ही दामन भरोगे ना-मुरादों के

ग़रीबों बेकसों का और, प्यारे ! कौन वाली है

हमेशा तुम करम करते हो बिगड़े हाल वालों पर

बिगड़ कर मेरी हालत ने मेरी बिगड़ी बना ली है

तुम्हारे दर तुम्हारे आस्ताँ से मैं कहाँ जाऊँ

न मुझ सा कोई बेकस है, न तुम सा कोई वाली है

हसन का दर्द-दुख मौक़ूफ़ फ़रमा कर बहाली दो

तुम्हारे हाथ में दुनिया की मौक़ूफ़ी बहाली है

शायर:

मौलाना हसन रज़ा ख़ान

ना'त-ख़्वाँ:

ओवैस रज़ा क़ादरी