नूर का समाँ छाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
फ़ैज़-ए-मुस्तफ़ा लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
ज़िक्र-ओ-फ़िक्र-ए-दुनिया से हट के हुस्न-ए-अख़्तर ने
दिल में जल्वा फ़रमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
मुद्दतों से थे बेचैन, रज़वियों के दोनों नैन
इंतिज़ार रंग लाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
हासिदों के सीने पे देखिए गिरी बिजली
क़ल्ब-ए-सुन्नी मुस्काया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
फ़ज़्ल-ए-मुस्तफ़ा से वो का'बे के बने मेहमाँ
वाह क्या शरफ़ पाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
देख कर, ऐ दीवानो ! हुस्न-ए-रू-ए-अख़्तर को
चाँद भी है शरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
वाह वाह ! ज़रा देखो हल्क़ा ज़िक्र-ए-अख़्तर का
किस-क़दर है गरमाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
दस्त-ए-शाह-ए-अस्जद से जाम-ए-अज़हरी पीजे
कासा फिर से छलकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
ग़ौल-ए-सुल्ह-ए-कुल्ली में ज़लज़ला किया बरपा
नज्द जिन से लरज़ाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
साल भर से पर्दे में था समाँ ये नूरानी
रुख़ से पर्दा सरकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
सुन्नियो ! चले आओ साया-ए-बरेली में
अब्र-ए-नूर बरसाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
'उर्स-ए-फ़ख़्र-ए-अज़हर की बरकतें हैं ये, अय्यूब !
मेरा क़ल्ब चमकाया, 'उर्स-ए-अज़हरी आया
शायर:
मुहम्मद अय्यूब रज़ा अमजदी
ना'त-ख़्वाँ:
साबिर रज़ा अज़हरी सुरत