Hindi #17

Sair-e-Gulshan Kaun Dekhe Dasht-e-Tayba Chhod Kar

📜 Hindi 🎵 29 Lines ⏱️ 2 Min Read ✨ Naat Shareef

सैर-ए-गुलशन कौन देखे दश्त-ए-तयबा छोड़ कर

सू-ए-जन्नत कौन जाए दर तुम्हारा छोड़ कर

सरगुज़श्त-ए-ग़म कहूँ किस से तेरे होते हुए

किस के दर पर जाऊँ तेरा आस्ताना छोड़ कर

बे-लिक़ा-ए-यार उन को चैन आ जाता अगर

बार बार आते न यूँ जिब्रील सिदरा छोड़ कर

कौन कहता है दिल-ए-बे-मुद्द'आ है ख़ूब चीज़

मैं तो कोड़ी को न लूँ उन की तमन्ना छोड़ कर

मर ही जाऊँ मैं अगर इस दर से जाऊँ दो क़दम

क्या बचे बीमार-ए-ग़म क़ुर्ब-ए-मसीहा छोड़ कर

किस तमन्ना पर जिएँ, या रब ! असीरान-ए-क़फ़स

आ चुकी बाद-ए-सबा बाग़-ए-मदीना छोड़ कर

बख़्शवाना मुझ से 'आसी का रवा होगा किसे

किस के दामन में छुपूँ दामन तुम्हारा छोड़ कर

ख़ुल्द कैसा ? नफ़्स-ए-सरकश ! जाऊँगा तयबा को मैं

बद-चलन हट कर खड़ा हो मुझ से रस्ता छोड़ कर

ऐसे जल्वे पर करूँ मैं लाख हूरों को निसार

क्या ग़रज़ क्यूँ जाऊँ जन्नत को मदीना छोड़ कर

हश्र में एक एक का मूँह तकते फिरते हैं 'अदू

आफ़तों में फँस गए उन का सहारा छोड़ कर

मर के जीते हैं जो उन के दर पे जाते हैं, हसन !

जी के मरते हैं जो आते हैं मदीना छोड़ कर

शायर:

मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवी

ना'त-ख़्वाँ:

ओवैस रज़ा क़ादरी

साबिर रज़ा अज़हरी सुरत

असद रज़ा अत्तारी

सय्यिद अहमद सोहरवर्दी